बारी मुझसे बात करने आ धमका। मैं स्वयं पहल करके उससे अथवा किसी भी सरकारी अधिकारी से बात नहीं करता था। वह स्वयं आ गया तो स्पष्ट रूप में उसके सामने इष्ट मत प्रस्तुत करने में कभी हिचकिचाता भी नहीं था। यह बात बारी साहब को ज्ञात होने के कारण वह कोई भी विशेष घटना घटने पर मेरा अभिप्राय जानने के लिए आ धमकता। उस दिन भी महाशय सस्मित वदन पधारे। दुष्ट भाषण के वे इतने आदी थे कि नरम विनोद में भी सहज ही मर्मभेदी शब्दों का प्रयोग करते थे।
बारी मुझसे बात करने आ धमका। मैं स्वयं पहल करके उससे अथवा किसी भी सरकारी अधिकारी से बात नहीं करता था। वह स्वयं आ गया तो स्पष्ट रूप में उसके सामने इष्ट मत प्रस्तुत करने में कभी हिचकिचाता भी नहीं था। यह बात बारी साहब को ज्ञात होने के कारण वह कोई भी विशेष घटना घटने पर मेरा अभिप्राय जानने के लिए आ धमकता। उस दिन भी महाशय सस्मित वदन पधारे। दुष्ट भाषण के वे इतने आदी थे कि नरम विनोद में भी सहज ही मर्मभेदी शब्दों का प्रयोग करते थे।