इसके पश्चात् लगभग आठ महीनों तक, बारी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उल्लास को पागल ठहराकर रूग्णालय भेजने के पश्चात् भी, वे कई दिनांे तक यही रट लगाते रहे कि उल्लास पागल नहीं है, वह ढोंग कर रहा है। उन्होंने ऐसे ढोंग करनेवाले कई निघरे, ढीठ बंदी देखे थे कि उनकी यह आजमाने की शक्ति ही कि क्या सच है और क्या झूठ है, भोथरी हो चुकी थी। सहानुभूति का झरना सूख चुका था। तथापि कोई यह न समझे कि बंदियों का जगत् छोड़ने पर अन्य जनों से भी बारी इसी तरह निर्मम,
इसके पश्चात् लगभग आठ महीनों तक, बारी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उल्लास को पागल ठहराकर रूग्णालय भेजने के पश्चात् भी, वे कई दिनांे तक यही रट लगाते रहे कि उल्लास पागल नहीं है, वह ढोंग कर रहा है। उन्होंने ऐसे ढोंग करनेवाले कई निघरे, ढीठ बंदी देखे थे कि उनकी यह आजमाने की शक्ति ही कि क्या सच है और क्या झूठ है, भोथरी हो चुकी थी। सहानुभूति का झरना सूख चुका था। तथापि कोई यह न समझे कि बंदियों का जगत् छोड़ने पर अन्य जनों से भी बारी इसी तरह निर्मम,