के लिए आवेदन-पर-आवेदन करना शुरू किया। इन वर्ष-डेढ़ वर्ष में मुझे बारी के शिंकजे में पूरी तरह से फंसकर दंड भुगतने के दो बार अवसर आए थे।¹ एक बार बाहर का समाचार और किसी समाचार-
पत्र के टुकड़े भीतर लाने के लिए मैंने अनामिक पत्र लिखा। जिस व्यक्ति ने बाहर ले जाना स्वीकार किया था, वह बारी का गुप्तचर था, अतः वह पत्र अचानक अधिकारी के हाथ में पड़ गया। मैंने उसका नाम नहीं बताया, जिसे वह पत्र दिया थां बस इतना ही कहा था कि अमुक स्थान पर वह व्यक्ति मिलेगा,
के लिए आवेदन-पर-आवेदन करना शुरू किया। इन वर्ष-डेढ़ वर्ष में मुझे बारी के शिंकजे में पूरी तरह से फंसकर दंड भुगतने के दो बार अवसर आए थे।¹ एक बार बाहर का समाचार और किसी समाचार-
पत्र के टुकड़े भीतर लाने के लिए मैंने अनामिक पत्र लिखा। जिस व्यक्ति ने बाहर ले जाना स्वीकार किया था, वह बारी का गुप्तचर था, अतः वह पत्र अचानक अधिकारी के हाथ में पड़ गया। मैंने उसका नाम नहीं बताया, जिसे वह पत्र दिया थां बस इतना ही कहा था कि अमुक स्थान पर वह व्यक्ति मिलेगा,