मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

काम करना आरंभ करते ही अधिकारियों ने हड़ताल में नेता के रूप में, जो उनके अधिक कोपभाजन बने थे, उन्हें बाहर भेजने से साफ इन्कार कर दिया। मेरे बंधु, श्री वामनराव जोशी, होतीलाल, श्री नानी गोपाल तथा और दो-तीन लोगों को बाहर नहीं निकाला गया। मेरा तो नाम ही मत लीजिए। हड़ताल में मैंने काम नहीं छोड़ा था, तथापि हड़ताल का ठीकरा मुख्यतः मेरे सिर पर ही फोड़ा गया। यह उचित ही हुआ कि उन राजबंदियों को भी बाहर भेजा गया जिन्होंने हड़ताल में प्रत्यक्ष भाग लिया था,


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काम करना आरंभ करते ही अधिकारियों ने हड़ताल में नेता के रूप में, जो उनके अधिक कोपभाजन बने थे, उन्हें बाहर भेजने से साफ इन्कार कर दिया। मेरे बंधु, श्री वामनराव जोशी, होतीलाल, श्री नानी गोपाल तथा और दो-तीन लोगों को बाहर नहीं निकाला गया। मेरा तो नाम ही मत लीजिए। हड़ताल में मैंने काम नहीं छोड़ा था, तथापि हड़ताल का ठीकरा मुख्यतः मेरे सिर पर ही फोड़ा गया। यह उचित ही हुआ कि उन राजबंदियों को भी बाहर भेजा गया जिन्होंने हड़ताल में प्रत्यक्ष भाग लिया था,


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