इतना घिसा जाता कि उसकी पीठ रक्तरंजित हो जाती और भयंकर जलन होने लगती। परंतु वह डटा रहा। दुष्ट पठान एकांत में उसे बीभत्स गालियां देता। दिन में वह नग्न रहता, अतः रात में भी उसका एक कंबल छीन लिया गया तो उसने दूसरा कंबल भी फेंक दिया। वैसा ही नंग-धड़ग वह दिन-रात सर्दी में ठिठुरता हुआ नंगी भूमि पर महीनों पड़ा रहा। उसकी प्रमुख मांग यह थी कि हम लोगों की राजबंदियों में गणना की जाए।
वह कहता-यह प्रश्न गौण है कि अन्न अच्छा है या बुरा।
इतना घिसा जाता कि उसकी पीठ रक्तरंजित हो जाती और भयंकर जलन होने लगती। परंतु वह डटा रहा। दुष्ट पठान एकांत में उसे बीभत्स गालियां देता। दिन में वह नग्न रहता, अतः रात में भी उसका एक कंबल छीन लिया गया तो उसने दूसरा कंबल भी फेंक दिया। वैसा ही नंग-धड़ग वह दिन-रात सर्दी में ठिठुरता हुआ नंगी भूमि पर महीनों पड़ा रहा। उसकी प्रमुख मांग यह थी कि हम लोगों की राजबंदियों में गणना की जाए।
वह कहता-यह प्रश्न गौण है कि अन्न अच्छा है या बुरा।