देशभक्ति उत्पन्न करना अपना कारावासीय कर्तव्य माना था, सप्ताह भर में वे जो कुछ चोरी-छिपे समाचार प्राप्त करते, उन्हें एक कागज पर उतारकर उसके साथ एकाध देशभक्ति पर कविता लिखकर उस कागज की पांडुलिपि की दस-बीस प्रतियां जिले में बांटते। आगे चलकर उसमें एक संपादकीय लेख भी लिखा जाने लगा। अर्थात् वह कागज समाचार-पत्र का पिल्ला शोभायमान होने लगा। बंदियों में से कुछ के आगे बढ़ते-बढ़ते वहां के कुछ ‘स्वतंत्र’ लोगों से भी परिचय हुआ और राजबंदियों
देशभक्ति उत्पन्न करना अपना कारावासीय कर्तव्य माना था, सप्ताह भर में वे जो कुछ चोरी-छिपे समाचार प्राप्त करते, उन्हें एक कागज पर उतारकर उसके साथ एकाध देशभक्ति पर कविता लिखकर उस कागज की पांडुलिपि की दस-बीस प्रतियां जिले में बांटते। आगे चलकर उसमें एक संपादकीय लेख भी लिखा जाने लगा। अर्थात् वह कागज समाचार-पत्र का पिल्ला शोभायमान होने लगा। बंदियों में से कुछ के आगे बढ़ते-बढ़ते वहां के कुछ ‘स्वतंत्र’ लोगों से भी परिचय हुआ और राजबंदियों