का ‘वनज’ बढ़ने लगा। ये ‘स्वतंत्र’ अर्थात् भूतपूर्व बंदियों की मुक्ति के पश्चात् वहीं पर बसे हुए परिवारों की संतति थी। राजबंदियों के इस आंदोलन की वार्त्ता अतिशयोक्ति द्वारा गुब्बारा बनते-बनते
एक षड्यंत्र का रूप धारण कर अधिकारियों के कानों तक पहुंच गई। इसी समय अंदमान स्थित राजबंदियों की स्थिति, इंदुभूषण की फांसी, उल्लासकर के पागलपन से संबंधित गुप्त रूप से भेजे गए कुछ पत्र हिंदुस्थान पहंुच गए और वह यातनाओं की लोमहर्षक
का ‘वनज’ बढ़ने लगा। ये ‘स्वतंत्र’ अर्थात् भूतपूर्व बंदियों की मुक्ति के पश्चात् वहीं पर बसे हुए परिवारों की संतति थी। राजबंदियों के इस आंदोलन की वार्त्ता अतिशयोक्ति द्वारा गुब्बारा बनते-बनते
एक षड्यंत्र का रूप धारण कर अधिकारियों के कानों तक पहुंच गई। इसी समय अंदमान स्थित राजबंदियों की स्थिति, इंदुभूषण की फांसी, उल्लासकर के पागलपन से संबंधित गुप्त रूप से भेजे गए कुछ पत्र हिंदुस्थान पहंुच गए और वह यातनाओं की लोमहर्षक