की शक्ति प्रदान करता। क्योंकि हम किसी भी तरह कुचले गए तो भी हमसे पूछता कौन है-इस भावना से जो एक तीव्र निराशा मन को भग्नोत्साहित करती, वह क्षण मात्र में दूर होती। लेशमात्र वह तुष्टि प्राप्त होती कि जो यातनाएं हम भुगत रहे हैं, वे सर्वथा निरूपयुक्त न रहकर उनके प्रकाशन से उधर उस महान् अग्नि में तेल की एक बूंद क्यों न हो, उंडेल सकती है-यही विचार मन को पुनःसशक्त एवं सहनशील बनाता। दूसरे पक्ष में आज नहीं तो कल इसकी छानबीन हुए
की शक्ति प्रदान करता। क्योंकि हम किसी भी तरह कुचले गए तो भी हमसे पूछता कौन है-इस भावना से जो एक तीव्र निराशा मन को भग्नोत्साहित करती, वह क्षण मात्र में दूर होती। लेशमात्र वह तुष्टि प्राप्त होती कि जो यातनाएं हम भुगत रहे हैं, वे सर्वथा निरूपयुक्त न रहकर उनके प्रकाशन से उधर उस महान् अग्नि में तेल की एक बूंद क्यों न हो, उंडेल सकती है-यही विचार मन को पुनःसशक्त एवं सहनशील बनाता। दूसरे पक्ष में आज नहीं तो कल इसकी छानबीन हुए