बिना नहीं रहेगी कि राजबंदियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। इतना ही नहीं, वहां के अधिकारियों के मन में इस प्रकार का भय भी उत्पन्न होगा कि प्रसंगवश उन्हें इससे संबंधित उत्तर भी देना पड़ेगा-वे बहुत ही विवेकशील आचरण करने लगे और प्रत्येक काम हिंदुस्थान सरकार की अनुमति लेकर ही करते। इस परिणाम का और इस भय का प्रथम अनुभव नहीं होता। प्रथम तो इसके विपरीत हमें अधिक कठोर मुसीबतों से सामना करना पड़ता। परंतु अंत में उसी योग से उन्हें
बिना नहीं रहेगी कि राजबंदियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। इतना ही नहीं, वहां के अधिकारियों के मन में इस प्रकार का भय भी उत्पन्न होगा कि प्रसंगवश उन्हें इससे संबंधित उत्तर भी देना पड़ेगा-वे बहुत ही विवेकशील आचरण करने लगे और प्रत्येक काम हिंदुस्थान सरकार की अनुमति लेकर ही करते। इस परिणाम का और इस भय का प्रथम अनुभव नहीं होता। प्रथम तो इसके विपरीत हमें अधिक कठोर मुसीबतों से सामना करना पड़ता। परंतु अंत में उसी योग से उन्हें