बाहर जाएंगे। उस इमारत की दीवारों पर छिप-छिपकर जो कविताएं टांकी थी, उन्हें जल्दी-जल्दी कंठस्थ करके सोमवार की प्रतीक्षा करने लगा। परंतु मुझे रत्ती भर विश्वास नहीं हो रहा था कि वे मुझे बाहर भेजंेगे। सोमवार आ गया। अन्य कई बंदियों को बाहर भेजा गया, परंतु मै। ज्यों-का-त्यों अपनी कोठरी में ही बंद। तीसरे दिन पर्यवेक्षक आ गया। मैंने पूछा, यह क्या?
वह तनिक वचन का सच्चा था। उसी ने मुझे सोमवार का दिन बताया था, अतः वह कुछ खिसिया सा गया। उसने कहा,
बाहर जाएंगे। उस इमारत की दीवारों पर छिप-छिपकर जो कविताएं टांकी थी, उन्हें जल्दी-जल्दी कंठस्थ करके सोमवार की प्रतीक्षा करने लगा। परंतु मुझे रत्ती भर विश्वास नहीं हो रहा था कि वे मुझे बाहर भेजंेगे। सोमवार आ गया। अन्य कई बंदियों को बाहर भेजा गया, परंतु मै। ज्यों-का-त्यों अपनी कोठरी में ही बंद। तीसरे दिन पर्यवेक्षक आ गया। मैंने पूछा, यह क्या?
वह तनिक वचन का सच्चा था। उसी ने मुझे सोमवार का दिन बताया था, अतः वह कुछ खिसिया सा गया। उसने कहा,