‘‘चीफ कमिश्नर रंगून गए हैं। आते ही पता चलेगा।’’ तभी मेरा माथा ठनका। आखिर कमिश्नर रंगून से लेफ्टिनेंट गवर्नर से भेंट करके आ गया। पता नही वहां क्या खिचड़ी पकी, परंतु मुझे बाहर भेजने के स्थान पर एक दिन प्रातःकाल के समय उन सारे राजबंदियों की , जो बाहर गए थे, पूरे अंदमान में अचानक पकड़-धकड़ आरंभ हो गई। किसी को हथकड़ियां डाली गई, किसी को वैसे ही पकड़ा। किसी की कोठरी की तलाशी ली गई। बात-ही-बात मंे राजबंदियों की इस आपत्तिा का पहाड़ अन्य लोगों पर भी टूट पड़ा। कुछ स्वतंत्र घरों की,
‘‘चीफ कमिश्नर रंगून गए हैं। आते ही पता चलेगा।’’ तभी मेरा माथा ठनका। आखिर कमिश्नर रंगून से लेफ्टिनेंट गवर्नर से भेंट करके आ गया। पता नही वहां क्या खिचड़ी पकी, परंतु मुझे बाहर भेजने के स्थान पर एक दिन प्रातःकाल के समय उन सारे राजबंदियों की , जो बाहर गए थे, पूरे अंदमान में अचानक पकड़-धकड़ आरंभ हो गई। किसी को हथकड़ियां डाली गई, किसी को वैसे ही पकड़ा। किसी की कोठरी की तलाशी ली गई। बात-ही-बात मंे राजबंदियों की इस आपत्तिा का पहाड़ अन्य लोगों पर भी टूट पड़ा। कुछ स्वतंत्र घरों की,