विद्रोही यदि सफल होते थे तो वे भी चाल्र्स जैसे राजा
को फांसी पर लटकाते थे। आज दोनों पक्षों में अधिक शिष्ट तथा सौम्य व्यवहार करना हम अपने में हुआ सुधार, विकासनशीलता का लक्षण मानते हैं, और जब तक आप अपनी ओर से समझ रहे हैं तब तक ही हम भी कहते हैं कि आपके नियमानुसार ही हमसे व्यवहार किया जाए। आप बिना नियम सरेआम अत्याचार करने लगे तो फिर हम उस अवस्था का भी जैसे-तैसे सामना करेंगे ही।
इस सभांषण के पश्चात् बात घूम-फिरकर फिर
विद्रोही यदि सफल होते थे तो वे भी चाल्र्स जैसे राजा
को फांसी पर लटकाते थे। आज दोनों पक्षों में अधिक शिष्ट तथा सौम्य व्यवहार करना हम अपने में हुआ सुधार, विकासनशीलता का लक्षण मानते हैं, और जब तक आप अपनी ओर से समझ रहे हैं तब तक ही हम भी कहते हैं कि आपके नियमानुसार ही हमसे व्यवहार किया जाए। आप बिना नियम सरेआम अत्याचार करने लगे तो फिर हम उस अवस्था का भी जैसे-तैसे सामना करेंगे ही।
इस सभांषण के पश्चात् बात घूम-फिरकर फिर