उसी बिंदु पर आ गई। अंदमान की बंदी-संस्था विषयक भी कुछ प्रश्नोत्तर हुए और हमें बताया गया कि हिंदुस्थान सरकार ही उत्तर भेजेगी।
क्रैडाॅक धमकाते हुए चले गए, उत्तर भी नहीं आया। अंदमान के अधिकारी कहने लगे, अब वर्तमान स्थिति पर ही संतोष करो। परंतु सभी राजबंदियों ने निश्चय किया कि कोई-न-कोई आंदोलन छेड़े बिना चैन से नहीं बैठेंगे और उन्होंने तीसरी हड़ताल का आह्मन किया। कोई एक-दो जनों को छोड़कर सभी ने काम करना छोड़ दिया। छह-छह मास
उसी बिंदु पर आ गई। अंदमान की बंदी-संस्था विषयक भी कुछ प्रश्नोत्तर हुए और हमें बताया गया कि हिंदुस्थान सरकार ही उत्तर भेजेगी।
क्रैडाॅक धमकाते हुए चले गए, उत्तर भी नहीं आया। अंदमान के अधिकारी कहने लगे, अब वर्तमान स्थिति पर ही संतोष करो। परंतु सभी राजबंदियों ने निश्चय किया कि कोई-न-कोई आंदोलन छेड़े बिना चैन से नहीं बैठेंगे और उन्होंने तीसरी हड़ताल का आह्मन किया। कोई एक-दो जनों को छोड़कर सभी ने काम करना छोड़ दिया। छह-छह मास