मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

प्राप्त हम थोड़े ही दंडित शेष रहे। एकाध सावधि कैदी पीछे रह गया था। प्रायः सभी को टोली-टोली में अपना भोजन अपने आप बनाने की सुविधा दी गई, जिससे अच्छा भोजन मिलने लगा। कुछ लोगों को छापाखाना, गं्रथालय (उसका वृत्तांत आगे आएगा), नक्शे निकालना- इस तरह के काम दिए गए और उन्हें पांच रूपए प्रतिमास वेतन भी मिलने लगा। पैसों की दुर्लभता ही नहीं, दुर्दृश्यता भी जिस कारागृह में थी, उसमें उसे ही धन्ना सेठ समझा जाता जिसके पास पांच रूपये


972 of 2228

प्राप्त हम थोड़े ही दंडित शेष रहे। एकाध सावधि कैदी पीछे रह गया था। प्रायः सभी को टोली-टोली में अपना भोजन अपने आप बनाने की सुविधा दी गई, जिससे अच्छा भोजन मिलने लगा। कुछ लोगों को छापाखाना, गं्रथालय (उसका वृत्तांत आगे आएगा), नक्शे निकालना- इस तरह के काम दिए गए और उन्हें पांच रूपए प्रतिमास वेतन भी मिलने लगा। पैसों की दुर्लभता ही नहीं, दुर्दृश्यता भी जिस कारागृह में थी, उसमें उसे ही धन्ना सेठ समझा जाता जिसके पास पांच रूपये


972 of 2228