के मन में भी सामाजिक तत्तव जड़ पकड़ने लगे। स्वदेश, स्वधर्म, जनसेवा आदि शब्दों से परिचित होकर उनकी सामाजिक नीतिमत्ता परिवर्धित होने लगी। उसमें भी हिंदू बंदियों में इन गुणों का प्रादुर्भाव शीघ्रतापूर्वक होने लगा। पीछे कहा ही गया है कि उनकी शिक्षा के विरूद्व अधिकारियांे ने कितनी कठोर नीति अपनाई थी। परंतु राजबंदियों के प्रयासों के कारण वह अब बहुत ही ढुलमुल हो गई थी। मुसलमान वाॅर्डरों के पास ही नहीं अपितु बंदियों के पास भी कुरान
के मन में भी सामाजिक तत्तव जड़ पकड़ने लगे। स्वदेश, स्वधर्म, जनसेवा आदि शब्दों से परिचित होकर उनकी सामाजिक नीतिमत्ता परिवर्धित होने लगी। उसमें भी हिंदू बंदियों में इन गुणों का प्रादुर्भाव शीघ्रतापूर्वक होने लगा। पीछे कहा ही गया है कि उनकी शिक्षा के विरूद्व अधिकारियांे ने कितनी कठोर नीति अपनाई थी। परंतु राजबंदियों के प्रयासों के कारण वह अब बहुत ही ढुलमुल हो गई थी। मुसलमान वाॅर्डरों के पास ही नहीं अपितु बंदियों के पास भी कुरान