अथवा अन्य धार्मिक पुस्तकें होती और कभी-कभी काम टालने के लिए वे उनका पाठ करते। परंतु हिंदुओं को अपनी धार्मिक पुस्तकें रखना और पढ़ना चोरी जैसा काम होता। या तो वरिष्ठ अधिकारी उन्हें रोकते या कभी वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति मिलने पर मुसलमान जमादार बाधा खडी़ करते । पांच-दस हिंदू बंदी विश्राम के दिन भी तुलसी रामायण पढ़ने बैठे तो इसका कोई नियम नहीं होता कि मुसलमान तंडेल अथवा मिर्जा खान उन पर कब अचानक डंडे बरसा दें। इस तरह के अवसर
अथवा अन्य धार्मिक पुस्तकें होती और कभी-कभी काम टालने के लिए वे उनका पाठ करते। परंतु हिंदुओं को अपनी धार्मिक पुस्तकें रखना और पढ़ना चोरी जैसा काम होता। या तो वरिष्ठ अधिकारी उन्हें रोकते या कभी वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति मिलने पर मुसलमान जमादार बाधा खडी़ करते । पांच-दस हिंदू बंदी विश्राम के दिन भी तुलसी रामायण पढ़ने बैठे तो इसका कोई नियम नहीं होता कि मुसलमान तंडेल अथवा मिर्जा खान उन पर कब अचानक डंडे बरसा दें। इस तरह के अवसर