हमने कई बार देखे। ऐसे पठानी तंडेलों तथा पंजाबी मुसलमानों से सभी परिचित थे, जो धार्मिक पुस्तकों में छपे चित्र देखकर इस तरह की ‘बुतपरस्त’ (मूर्तिपूजक) पुस्तकें हिंदुओं द्वारा पढ़ने का विरोध करना अपना परम कर्तव्य मानते थे। ऐसी अवस्था में राजबंदियों में से हम जैसे लोगों को यह सब असह्म हो जाता, तो हम यह बखेड़ा
वरिष्ठ अधिकारियों तक ले जाते। बार-बार ऐसा करने से हिंदू बंदियों द्वारा पुस्तक रखने पर किया जानेवाला प्रत्यक्ष या
हमने कई बार देखे। ऐसे पठानी तंडेलों तथा पंजाबी मुसलमानों से सभी परिचित थे, जो धार्मिक पुस्तकों में छपे चित्र देखकर इस तरह की ‘बुतपरस्त’ (मूर्तिपूजक) पुस्तकें हिंदुओं द्वारा पढ़ने का विरोध करना अपना परम कर्तव्य मानते थे। ऐसी अवस्था में राजबंदियों में से हम जैसे लोगों को यह सब असह्म हो जाता, तो हम यह बखेड़ा
वरिष्ठ अधिकारियों तक ले जाते। बार-बार ऐसा करने से हिंदू बंदियों द्वारा पुस्तक रखने पर किया जानेवाला प्रत्यक्ष या