वे उनके द्वारा किए गए घपले कहीं राजबंदी उजागर न कर दें, इस डर से उनकी जी हुजूरी भी करते। राजबंदियों के उपदेशों से मुसलमानों में भी राष्ट्रीय प्रवृत्तिा के लोग आगे आ गए। वे उपयुक्त भी सिद्व हुए। परंतु आगे चलकर जैसे-जैसे शुद्वि आदि आंदोलन करना राजबंदियों के लिए अनिवार्य हो गया वैसे-वैसे उनमें उनकी जन्मजात धर्मांधता भी उभर आई।
बंदियों की शिक्षा के लिए जब पाठ्य-पुस्तकें रखने की थोड़ी सुविधा प्राप्त हो गई तब मुख्य प्रश्न
वे उनके द्वारा किए गए घपले कहीं राजबंदी उजागर न कर दें, इस डर से उनकी जी हुजूरी भी करते। राजबंदियों के उपदेशों से मुसलमानों में भी राष्ट्रीय प्रवृत्तिा के लोग आगे आ गए। वे उपयुक्त भी सिद्व हुए। परंतु आगे चलकर जैसे-जैसे शुद्वि आदि आंदोलन करना राजबंदियों के लिए अनिवार्य हो गया वैसे-वैसे उनमें उनकी जन्मजात धर्मांधता भी उभर आई।
बंदियों की शिक्षा के लिए जब पाठ्य-पुस्तकें रखने की थोड़ी सुविधा प्राप्त हो गई तब मुख्य प्रश्न