जिनके ह्नदय में देशभक्ति का बीज पड़ा था, उन साधारण बंदियों को प्रवेश मिलने लगा। वे बंदीवान जब छह माह अथवा एक वर्ष के पश्चात् बाहर निकलते तब उसी पद्वति के अनुसार अपने स्वतंत्र मंडल प्रस्थापित करते। इसी संस्था में आगे चलकर शिक्षा प्रचारार्थ प्राप्ति के पीछे प्रत्येक को रूपए के लिए इकन्नी, पांच रूपए के लिए अठन्नी- इस तरह चढ़ती श्रेणी का शुल्क रखा गया। कुछ बंदियों को बाहर कुछ इस तरह के अधिकार प्राप्त होते थे कि वे सहजता से
जिनके ह्नदय में देशभक्ति का बीज पड़ा था, उन साधारण बंदियों को प्रवेश मिलने लगा। वे बंदीवान जब छह माह अथवा एक वर्ष के पश्चात् बाहर निकलते तब उसी पद्वति के अनुसार अपने स्वतंत्र मंडल प्रस्थापित करते। इसी संस्था में आगे चलकर शिक्षा प्रचारार्थ प्राप्ति के पीछे प्रत्येक को रूपए के लिए इकन्नी, पांच रूपए के लिए अठन्नी- इस तरह चढ़ती श्रेणी का शुल्क रखा गया। कुछ बंदियों को बाहर कुछ इस तरह के अधिकार प्राप्त होते थे कि वे सहजता से