न्याय विभाग के अधिकारी तथा अन्य प्रशासन विभागीय अधिकारियों ने, जो हिंदुस्थान के शिक्षित वर्ग से केवल नौकरी करने आए हुए थे, और जिनमें से बहुत सारे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हमसे भी परिचित हो गए थे, उन्होंने भी वह अभूतपूर्व नियमबद्व स्वदेश-सेवाव्रत स्वीकार कर लिया था। उसमें एक नियम था कि अब वह वर्ग सौ रूपए की प्राप्ति के पीछे पांच रूपए अंदमान में प्रचार कार्यार्थ संस्था को प्रदान करे। उस नियमानुसार कुछ लोग नियमित
न्याय विभाग के अधिकारी तथा अन्य प्रशासन विभागीय अधिकारियों ने, जो हिंदुस्थान के शिक्षित वर्ग से केवल नौकरी करने आए हुए थे, और जिनमें से बहुत सारे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हमसे भी परिचित हो गए थे, उन्होंने भी वह अभूतपूर्व नियमबद्व स्वदेश-सेवाव्रत स्वीकार कर लिया था। उसमें एक नियम था कि अब वह वर्ग सौ रूपए की प्राप्ति के पीछे पांच रूपए अंदमान में प्रचार कार्यार्थ संस्था को प्रदान करे। उस नियमानुसार कुछ लोग नियमित