पढ़ने से भी क्या लाभ होगा? बौद्विक अथवा राष्ट्रीय लाभ बताओ तो उनके पल्ले कुछ नहीं पड़ता। यह भय भी उनके मन में समाया हुआ था कि बारी साहब की उन पर वक्रदृष्टि है, जिन्हें पढ़ने-लिखने में रूचि है, तथापि बलपूर्वक, पकड़-धकड़कर जिस किसी से संपर्क होता, उसे पढ़ाने का प्रयास जारी था। किसी को कहते, तुम्हें जरा सी मराठी आते ही अंगे्रजी पढ़ाएंगे, फिर तुम छोटे से लेखक का काम कर सकोगे और ‘मुंशी’ बन जाओगे। बंदियों में ‘मुंशी’ का बड़ा मान था।
पढ़ने से भी क्या लाभ होगा? बौद्विक अथवा राष्ट्रीय लाभ बताओ तो उनके पल्ले कुछ नहीं पड़ता। यह भय भी उनके मन में समाया हुआ था कि बारी साहब की उन पर वक्रदृष्टि है, जिन्हें पढ़ने-लिखने में रूचि है, तथापि बलपूर्वक, पकड़-धकड़कर जिस किसी से संपर्क होता, उसे पढ़ाने का प्रयास जारी था। किसी को कहते, तुम्हें जरा सी मराठी आते ही अंगे्रजी पढ़ाएंगे, फिर तुम छोटे से लेखक का काम कर सकोगे और ‘मुंशी’ बन जाओगे। बंदियों में ‘मुंशी’ का बड़ा मान था।