मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

इस महत्तवकांक्षा से प्रेरित होकर कि ‘मैं मुंशी बनूंगा’ कई बंदी पढ़ने लगते। कुछ ही ऐसे निकलते जो केवल इस उदात्त भावना से कि वह हमारी विद्या है, अथवा हम धर्मग्रंथ पढ़ सकेंगे, अथवा यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है, प्रोढ़वस्था में अ-आ से श्रीगणेश करते।

परंतु इसका बखान क्यों करे कि यह काम कितने झंझट का था। अ, आ, क, ख, पढ़ने के लिए देते अथवा ‘घर, कर’ आदि शब्द इन निपट अनाड़ी बंदियों को चोरी-छिपे पढ़ाना, और उलटे उनकी चिरौरी भी करना।


994 of 2228

इस महत्तवकांक्षा से प्रेरित होकर कि ‘मैं मुंशी बनूंगा’ कई बंदी पढ़ने लगते। कुछ ही ऐसे निकलते जो केवल इस उदात्त भावना से कि वह हमारी विद्या है, अथवा हम धर्मग्रंथ पढ़ सकेंगे, अथवा यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है, प्रोढ़वस्था में अ-आ से श्रीगणेश करते।

परंतु इसका बखान क्यों करे कि यह काम कितने झंझट का था। अ, आ, क, ख, पढ़ने के लिए देते अथवा ‘घर, कर’ आदि शब्द इन निपट अनाड़ी बंदियों को चोरी-छिपे पढ़ाना, और उलटे उनकी चिरौरी भी करना।


994 of 2228