कभी-कभी तो मुफ्त मिली हुई स्लेटें-पुस्तकें रखने को भी वे तैयार नहीं होते। पढ़ने के भय से वे बात करना ही छोड़ देते। ऐसे लोगों का मन मोड़ने के लिए छात्रवृत्तिायां देनी पड़ती, वह भी अंदमानी मुद्रा में। अंदमान के कारागृह में रूपए की मुद्रा दूसरे दर्जे की थी- प्रधान कार्यकारी चलन ‘सुक्के’ का था। इस पारिभाषिक शब्द का अर्थ है-तंबाकू। शिष्य को तंबाकू की दो चुटकियां देने पर वह अपने गुरू पर पंद्रह-बीस मिनट तक पढ़ने का महान् उपकार करता।
कभी-कभी तो मुफ्त मिली हुई स्लेटें-पुस्तकें रखने को भी वे तैयार नहीं होते। पढ़ने के भय से वे बात करना ही छोड़ देते। ऐसे लोगों का मन मोड़ने के लिए छात्रवृत्तिायां देनी पड़ती, वह भी अंदमानी मुद्रा में। अंदमान के कारागृह में रूपए की मुद्रा दूसरे दर्जे की थी- प्रधान कार्यकारी चलन ‘सुक्के’ का था। इस पारिभाषिक शब्द का अर्थ है-तंबाकू। शिष्य को तंबाकू की दो चुटकियां देने पर वह अपने गुरू पर पंद्रह-बीस मिनट तक पढ़ने का महान् उपकार करता।