इस झंझट से तंग आकर प्रथम हमारे सहयोगी राजबंदी ऊबकर बंदियों को पढ़ाने का काम करने से स्पष्ट मना करते । कहते कि यह शक्ति का दुरूपयोग है, क्यांेकि हम जैसे बी.ए.,एम.ए. लोग अनाड़ी, अपराधी, चोर, डाकुओं को पुचकारकर उन्हें अ, आ, का पाठ पढ़ाएं और शब्द जोड़ने की कष्टप्रद माथापच्ची करते रहें- यह सचमुच ही उद्वेगजनक है। परंतु इस तरह की भावना हमारे सहयोगियों के मन में आते ही हम अपने मन को तथा उनके मन को पुनःपुनः प्रोत्साहित करते हुए कहते,
इस झंझट से तंग आकर प्रथम हमारे सहयोगी राजबंदी ऊबकर बंदियों को पढ़ाने का काम करने से स्पष्ट मना करते । कहते कि यह शक्ति का दुरूपयोग है, क्यांेकि हम जैसे बी.ए.,एम.ए. लोग अनाड़ी, अपराधी, चोर, डाकुओं को पुचकारकर उन्हें अ, आ, का पाठ पढ़ाएं और शब्द जोड़ने की कष्टप्रद माथापच्ची करते रहें- यह सचमुच ही उद्वेगजनक है। परंतु इस तरह की भावना हमारे सहयोगियों के मन में आते ही हम अपने मन को तथा उनके मन को पुनःपुनः प्रोत्साहित करते हुए कहते,