‘यह शक्ति का अपव्यय है न? अच्छा, फिर इस अवस्था में देशसेवार्थ कोई और अधिक महत्तवपूर्ण कृत्य आप कर सकते हैं? जो हां कहे, वह यह काम छोड़कर दूसरा अधिक
महत्तव का कार्य करे। परंतु समय केवल व्यर्थ की चिंता अथवा तिलमिलाहट सहते अथवा आपस में निरर्थक विवाद करने में व्यतीत करने से इन तुच्छ पतितों को पढ़ाने में उनकी मनःप्रवत्तिा परोपकार की ओर मोड़ने में व्यतीत करना क्या देश के लिए अधिक कल्याणकारी नहीं है? और देखिए, हम गांव-गांव में
‘यह शक्ति का अपव्यय है न? अच्छा, फिर इस अवस्था में देशसेवार्थ कोई और अधिक महत्तवपूर्ण कृत्य आप कर सकते हैं? जो हां कहे, वह यह काम छोड़कर दूसरा अधिक
महत्तव का कार्य करे। परंतु समय केवल व्यर्थ की चिंता अथवा तिलमिलाहट सहते अथवा आपस में निरर्थक विवाद करने में व्यतीत करने से इन तुच्छ पतितों को पढ़ाने में उनकी मनःप्रवत्तिा परोपकार की ओर मोड़ने में व्यतीत करना क्या देश के लिए अधिक कल्याणकारी नहीं है? और देखिए, हम गांव-गांव में