पंडित, मिशनरी, यूरोपीय कारागार में मात्र इसी कार्यार्थ अपना जीवन समर्पित करते हैं। रूस के शताधिक राज्य क्रांतिकारी विद्वान गांवों में घुसकल चुपचाप शिक्षा प्रसारार्थ माथा मार रहे हैं। फिर क्यों न हम इस स्थान पर उसी दृष्टि से वही कार्य करें? हम इन्हें मात्र शाब्दिक बारहखड़ियां नहीं पढ़ाते तो उस शाब्दिक शिक्षा की ओट में खड़े रहकर उनकी आत्माओं को आर्थिक बारहखड़ियां भी पढ़ा रहे हैं। हमारी संगत में आते ही उनके मन में स्वराष्ट्र,
पंडित, मिशनरी, यूरोपीय कारागार में मात्र इसी कार्यार्थ अपना जीवन समर्पित करते हैं। रूस के शताधिक राज्य क्रांतिकारी विद्वान गांवों में घुसकल चुपचाप शिक्षा प्रसारार्थ माथा मार रहे हैं। फिर क्यों न हम इस स्थान पर उसी दृष्टि से वही कार्य करें? हम इन्हें मात्र शाब्दिक बारहखड़ियां नहीं पढ़ाते तो उस शाब्दिक शिक्षा की ओट में खड़े रहकर उनकी आत्माओं को आर्थिक बारहखड़ियां भी पढ़ा रहे हैं। हमारी संगत में आते ही उनके मन में स्वराष्ट्र,